ख्वाब की ज़ुस्तज़ु में सवेरा न मिला,, परिंदे हिजरत से लौटे तो बसेरा न मिला,,, (प्रेम तपस्वी)
मुझ आईने को तोड़ने का हक़ सिर्फ तुमको है,मेरी जान, मैंने अपनी किस्मत का पत्थर दिल में सम्हाल रख्खा है,
प्रेम तपस्वी की बिल्कुल ओरिजिनल ग़ज़लें , नज़्म,शायरी प्रेम वियोग दर्द टूटे दिल के लिए ,दिल छू लेने वाली ताज़ी और मूल रचनाएं